रामविलास ने पंचायत चुनाव में मिल रही धमकियों से जान को खतरा होने की आशंका जताई थी और राज्य मानवाधिकार आयोग समेत दर्जनों इकाइयों से शिकायत भी की थी. लेकिन उनकी पूरी कवायद बेनतीजा रही. रामविलास के बेटे अभिषेक कुमार बताते हैं, ''पुलिस महकमा चाहता तो पिताजी की जान बच सकती थी. पुलिस ने न तो आरटीआइ आवेदनों पर अपराधी को गिरफ्तार किया और न ही सुरक्षा दिलवाई.'' अभिषेक की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लखीसराय के एसपी चौरसिया चंद्रशेखर आजाद से जवाब तलब किया है.
ऐसा ही कुछ बेगूसराय के बरौनी के शशिधर पांडे उर्फ खबरीलाल के साथ भी हुआ था. वे स्क्रैप माफिया और पुलिस के गठजोड़ को सबके सामने लाना चाहते थे. लेकिन 14 फरवरी, 2010 को उनकी हत्या कर दी गई थी. राजगीर के रामविलास कुछ खुशकिस्मत रहे. उनकी मुश्किलें उस समय शुरू 'ईं जब उन्होंने एसडीओ से नरेगा की जानकारी मांगी. उनके घर के दरवाजे में बिजली का करंट छोड़ दिया गया. बात नहीं बनी तो दो बार कुएं में जहरीली दवाइयां डालकर जान से मारने की कोशिश की गई. रामविलास बताते हैं, ''तत्कालीन एसडीओ के खिलाफ शिकायत करने पर राहत मिली.'' तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त शशांक कुमार सिंह ने एसडीओ कुलदीप नारायण को गैर-जिम्मेदार करार देते हुए जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया था.
ऐसा ही कुछ बेगूसराय के बरौनी के शशिधर पांडे उर्फ खबरीलाल के साथ भी हुआ था. वे स्क्रैप माफिया और पुलिस के गठजोड़ को सबके सामने लाना चाहते थे. लेकिन 14 फरवरी, 2010 को उनकी हत्या कर दी गई थी. राजगीर के रामविलास कुछ खुशकिस्मत रहे. उनकी मुश्किलें उस समय शुरू 'ईं जब उन्होंने एसडीओ से नरेगा की जानकारी मांगी. उनके घर के दरवाजे में बिजली का करंट छोड़ दिया गया. बात नहीं बनी तो दो बार कुएं में जहरीली दवाइयां डालकर जान से मारने की कोशिश की गई. रामविलास बताते हैं, ''तत्कालीन एसडीओ के खिलाफ शिकायत करने पर राहत मिली.'' तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त शशांक कुमार सिंह ने एसडीओ कुलदीप नारायण को गैर-जिम्मेदार करार देते हुए जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया था.
