जिल्ला जालोर युवा ग्रुप... दोस्तों हमारा ये, युवा ग्रुप एक मजबूत और जागरूक ग्रुप बनना चहिये,इसके लिए हमें ,हमारे गाव में से सभी युवाओ को जोड़ने की मुहीम चलानी चहिये ,जब हमारे हर गाव में ऐसे १० युवा एकता की डोर को अपना मकसद बना लेंगे तब हमें कोई नहीं रोक सकता हमारी जागरूकता को ,और एक दिन हमें भी हर जगह पे अपना फैसला लेने का मोका मिलेगा ये तब होगा जब हम एकजुट होंगे , मित्रो ना कानून कमजोर है, और ना ही आम युवा,सिर्फ कमजोर है ,तो वो है अपनी सोच ,उसको बदलने की जरुरत है , .....मिसन को मकसद बनाने के लिए युवा ग्रुप को एक होने की सख्त जरुरत है ,.......समाजसेवी जगदीश आर पुरोहित
रविवार, जनवरी 01, 2012
ऋतुओ में श्रेष्ठ मानी जाने वाली सर्द ऋतू का दौर अभी चालू है ,जिल्ला जालोर के लूर जोड्वाडा गाव के, लूर तिराए के पास बाबली के पास का ये नजारा है ,जो सर्द ऋतू के आगमन की झलक है ,लोग ताप रहे है ,क्युकी सर्दी का मोसम होता ही ऐसा है ,राह में चलते अगर ठण्ड ज्यादा लगने लगे ,तब वही आग जला कर अपना तन गर्म कर लेते है,......आ सियाला री ठण्ड .गर्म गर्म बाजरी रा सोगरा ,कड़ी और मुली रो साग ....आ हल्दी री सब्जी....जगदीश आर पुरोहित ,,,
राज्य सुचना आयोग जयपुर
में, आर टी आई एक्टिविस्ट जगदीश आर पुरोहित जालोर राजश्थान....अति कष्ट और पीड़ा महसूस करते हुए .मेरे सभी आर टी आई कार्यकर्ताओ को, आर टी आई एक्ट २००५ के सम्बन्ध में कुछ विवरण पेश कर रहा हु , कानून की मजाक और ढीले रवेइये की कुछ हकीकत है ये ,राज्य सुचना आयोग जयपुर राजश्थान जयपुर की ..मेने आर टी आई के तिहत राजश्थान के जिल्ला जालोर में दिनांक १०/५/२०११ से आज दिनांक १२/१२/२०११ तक राज्य सुचना आयोग जयपुर को ३६ द्वित्य अपील कर सुका हु ,आज तक एक भी द्वित्य अपील का निस्तारण नहीं किया ,आयोग में ,,दिनांक २२/९/२०११ से दिनांक १२/१२/२०११ तक ६ सिकायत कर सुका हु धारा १८[१] के अंतर्गत आज तक कोई जवाब नोटिस नहीं दिया गया आयोग द्वारा मेरे द्वारा की गयी द्वित्य अपील एवं सिकायत का विवरण निम्न प्रकार है ....[१]आवेदन १०/५/२०११ प्रथम अपील १५/६/२०११ द्वित्य अपील २९/८/२०११ [२] आवेदन ११/६/२०११ प्रथम अपील २१/७/२०११ द्वित्...य अपील २९/८/२०११ [३] आवेदन १४/६/२०११ प्रथम अपील२१/७/२०११ द्वित्य अपील २४/८/२०११ [४] आवेदन १/७/२०११ प्रथम अपील ४/८/२०११ द्वित्य अपील २९/८/२०११ [५] आवेदन २९/७/२०११ प्रथम अपील ४/८/२०११ द्वित्य अपील २९/८/२०११ [६] आवेदन २९/९/२०११ प्रथम अपील ४/८/२०११ द्वित्य अपील २९/८/२०११ [७]आवेदन २१/७/११ प्रथम अपील २९/८/२०११ द्वित्य अपील २९/९/२०११ [८] आवेदन ११/८/२०११ प्रथम अपील १३/९/२०११ द्वित्य अपील १५/१०/२०११ [९]आवेदन ८/८/२०११ प्रथम अपील १३/९/२०११ द्वित्य अपील १५/१०/२०११ [१०]आवेदन ८/८/२०११ प्रथम अपील १३/९/२०११ द्वित्य अपील १५/१०/२०११ [११]आवेदन ११/८/११ प्रथम अपील १३/९/२०११ द्वित्य अपील २१/१०/२०११ [१२]आवेदन १७/८/२०११ प्रथम अपील २२/९/२०११ द्वित्य अपील ३१ /१०/२०११ [१३]आवेदन १७/८/२०११ प्रथम अपील २०/९/२०११ द्वित्य अपील २७/१०/२०११ [१४]आवेदन १६/८/२०११ प्रथम अपील २२/९/२०११ द्वित्य अपील ३१/१०/२०११ [१५]आवेदन १७/८/२०११ प्रथम अपील २२/९/२०११ द्वित्य अपील ३१/१०/२०११ [१६]आवेदन २९/८/२०११ प्रथम अपील ३/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [१७]आवेदन 7/९ /२०११ प्रथम अपील १७ /१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [१८]आवेदन ९/९/२०११ प्रथम अपील १७/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११[१९] आवेदन२९/८/२०११ प्रथम अपील ३/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [२०] आवेदन ३/१०/२०११ प्रथम अपील ५/११/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [२१]आवेदन १५/९/२०११ प्रथम अपील १७/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [२२]आवेदन १५/९/२०११ प्रथम अपील १७/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [२३]आवेदन १५/९/२०११ प्रथम अपील १७/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ [२४]आवेदन ९/९/२०११ प्रथम अपील २१/१०/२०११ द्वित्य अपील ८/११/२०११ ...इस प्रकार है ,अपीलों का विवरण ..दिनांक १२/१२/२०११ को १२ द्वित्य अपील और भेजी है ,राज्य सुचना आयोग जयपुर राजश्थान को .....आज तक कोई जवाब नहीं ,,दिनांक २२/९/२०११ से दिनांक १२/१२/२०११ तक ६ सिकायत की है अधिनियम की धारा [१८]१ के अंतर्गत, आज तक एक भी सिकायत का नोटिस नहीं दिया आयोग ने ,अधिनियम के तिहत मेने तो मेरा काम कर लिया ,में आर टी आई एक्ट २००५ की इज्जत करते हुए माननीय मुख्या मंत्रीजी राजश्थान, माननीय राज्यपाल राजश्थान से अपील करते हुए कह रहा हु की मेरे द्वारा की गयी द्वित्य अपीलों का निस्तारण होगा या फिर नहीं ..मुझे बहुत हो रहा है ,की मेरी तरह और कितने आर टी आई कार्य करता दुखी है ,अधिकारी कानून की ध्जिया उड़ारहे है ,वन्देमातरम ,जय हिंद ....आर टी आई कार्यकर्ता जगदीश आर पुरोहित जालोर राजस्थान
राजश्थान ,हमारे राजश्थान की ओरतो की सान है ,घूँघट ,ये सान अभी धीरे धीरे लुप्त हो रही है ,आज हम सब प्रगतिसिल जमाने को देखे तो बहुत परिवर्तन हो रहा है ,लेकिन ओरत को घुंघट में ही रहना चहिये,जब से ये घुंघट उपर होता जा रहा है ,सब कुछ बिगड़ता जा रहा है ,मान मर्यादा ,और भी ...ओरत जब तक परदे में है ,तब तक सब ठीक ठाक है ,समाजसेवक जगदीश आर राजपुरोहित
हमारे समाज में महिलाओं के शिक्षित होने के बावजूद भी उसे सताए जाने, दहेज उत्पीडन, जलाये जाने जैसे घिनौने अपराधों से पीड़ित किये जाने के मामले मामले आए दिन सामने आते रहते हैं. लडकी अगर अपनी मर्जी से शादी करना चाहती है तो हमारा समाज उसे इसकी इजाजत नही देता. उस पर तरह-तरह के कलंक लगा दिए जाते हैं. अक्सर ही आनर कीलिंग की खबरें हमारे आसपास से सुनने को मिलती रहती हैं. जहाँ खोखली इज्जत के नाम पर अपनों के द्वारा ही अपनों का खून बहा दिया जाता है. हमारे घर समाज में अक्सर ही दावे किये जाते हैं कि अब लड़का लड़की को समान समझा जाता है, पर क्या यही है समानता ? ऊपर से कुछ और और अंदर से कुछ और. ये तो “हाथी के दांत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और” जैसी कहावत जैसा है......समाज सेवक जगदीश आर राजपुरोहित
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