राजश्थान ,हमारे राजश्थान की ओरतो की सान है ,घूँघट ,ये सान अभी धीरे धीरे लुप्त हो रही है ,आज हम सब प्रगतिसिल जमाने को देखे तो बहुत परिवर्तन हो रहा है ,लेकिन ओरत को घुंघट में ही रहना चहिये,जब से ये घुंघट उपर होता जा रहा है ,सब कुछ बिगड़ता जा रहा है ,मान मर्यादा ,और भी ...ओरत जब तक परदे में है ,तब तक सब ठीक ठाक है ,समाजसेवक जगदीश आर राजपुरोहित

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें