नई दिल्ली ,,,, सेक्स, साजिश और धोखे की इस अपराध कथा में हर मोड़ पर एक नया पेंच सामने आ रहा है। राजस्थान की नर्स भंवरी देवी हत्या मामले की लगभग सभी कड़ियां जोड़ लेने का दावा कर रही सीबीआइ की कहानी को अब एक नया झटका लगा है। सीबीआइ ने तीन बक्सों में भर कर जो हड्डियां फोरेंसिक जांच के लिए दी थीं, वे जानवरों की हैं। इनमें इंसानी हड्डी के सिर्फ दो छोटे टुकड़े पाए गए। ये भी इतने जले हुए हैं कि इनकी पहचान सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान [एम्स] के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सीबीआइ की ओर से सौंपे गए सुबूतों की जांच में पाया है कि इससे किसी नतीजे पर पहुंचना उनके लिए संभव नहीं। यहां के सूत्रों के मुताबिक कई तरह की फोरेंसिक जांच के बाद टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि सीबीआइ की ओर से दी गई अधिकांश हड्डियां पालतू जानवरों की हैं। जबकि मिले इंसानी टुकड़े इतने अधिक जले हैं कि उनकी डीएनए जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा सकती। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने जांच को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है। साथ ही ये सारे अवशेष जांच एजेंसी को लौटा दिए गए हैं।
भंवरी देवी के शरीर के अवशेषों के मामले में सीबीआइ का गच्चा खा जाना इसलिए ज्यादा हैरान करता है, क्योंकि सीबीआइ को उसके शरीर पर मौजूद बहुत से दूसरे सामान हासिल करने में कामयाबी मिल चुकी है। सीबीआइ ने जोधपुर के पास राजीव गांधी नहर से भंवरी की घड़ी, लाकेट और बिछिया आदि बरामद करने का दावा किया था। यहां तक कि भंवरी के बेटे ने यह पहचान भी कर ली थी कि ये सामान उसी का है। जांच एजेंसी ने यहीं से भंवरी देवी के शव के अवशेष भी जुटाए थे। इसी आधार पर सीबीआइ इस मामले के सारे छोर मिल जाने का दावा कर रही थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा, कांग्रेस विधायक मलखान सिंह बिश्नोई और भंवरी के पति अमरचंद ने मिल कर उसकी हत्या की साजिश रची थी। भंवरी के पास मदेरणा के साथ अंतरंग रिश्तों की सीडी थी, जिसके दम पर वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी। इस मामले में मदेरणा को न सिर्फ अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है, बल्कि जेल भी जाना पड़ा।
प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान [एम्स] के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सीबीआइ की ओर से सौंपे गए सुबूतों की जांच में पाया है कि इससे किसी नतीजे पर पहुंचना उनके लिए संभव नहीं। यहां के सूत्रों के मुताबिक कई तरह की फोरेंसिक जांच के बाद टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि सीबीआइ की ओर से दी गई अधिकांश हड्डियां पालतू जानवरों की हैं। जबकि मिले इंसानी टुकड़े इतने अधिक जले हैं कि उनकी डीएनए जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा सकती। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने जांच को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है। साथ ही ये सारे अवशेष जांच एजेंसी को लौटा दिए गए हैं।
भंवरी देवी के शरीर के अवशेषों के मामले में सीबीआइ का गच्चा खा जाना इसलिए ज्यादा हैरान करता है, क्योंकि सीबीआइ को उसके शरीर पर मौजूद बहुत से दूसरे सामान हासिल करने में कामयाबी मिल चुकी है। सीबीआइ ने जोधपुर के पास राजीव गांधी नहर से भंवरी की घड़ी, लाकेट और बिछिया आदि बरामद करने का दावा किया था। यहां तक कि भंवरी के बेटे ने यह पहचान भी कर ली थी कि ये सामान उसी का है। जांच एजेंसी ने यहीं से भंवरी देवी के शव के अवशेष भी जुटाए थे। इसी आधार पर सीबीआइ इस मामले के सारे छोर मिल जाने का दावा कर रही थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा, कांग्रेस विधायक मलखान सिंह बिश्नोई और भंवरी के पति अमरचंद ने मिल कर उसकी हत्या की साजिश रची थी। भंवरी के पास मदेरणा के साथ अंतरंग रिश्तों की सीडी थी, जिसके दम पर वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी। इस मामले में मदेरणा को न सिर्फ अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है, बल्कि जेल भी जाना पड़ा।
