जगदीश सिंह राजपुरोहित जोड़वाड़ा

जगदीश सिंह राजपुरोहित जोड़वाड़ा
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सोमवार, फ़रवरी 06, 2012

सीकर। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत चाही गई सूचना के आवेदन को लौटाना एक प्रधानाध्यापिका पर भारी पड़ गया। इस संबंध में राजस्थान सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त टी.श्रीनिवासन ने प्रधानाध्यापिका पर दस हजार रूपए का आर्थिक दण्ड लगाया है। यह राशि प्रधानाध्यापिका के वेतन से काटी जाएगी।
जानकारी के अनुसार बाय के उमेश कुमार शर्मा ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत छह अप्रेल, 2011 को रजिस्टर्ड डाक से राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय को आवेदन भेजा था। प्रधानाध्यापिका ममता अग्रवाल ने लिफाफे को लौटा दिया। अपील के बाद राजस्थान सूचना आयोग ने नोटिस जारी किया। इस पर प्रधानाध्यपिका ने करीब छह माह बाद 31 अक्टूबर, 2011 को सूचना तो दे दी, लेकिन देरी से दी और वह भी अपूर्ण।

यह मांगी थी सूचना
बाय गांव के एक निजी भवन में पिछले 40 वर्ष से संचालित हो रहे राजकीय बालिका विद्यालय को अचानक ही आबादी से दूर शिफ्ट कर दिया गया। इस पर आवेदनकर्ता उमेश कुमार शर्मा ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन पेशकर जानकारी चाही कि किसके निर्देश पर विद्यालय को शिफ्ट किया गया। इसके आदेश की प्रति मुहैया कराई जाए। पहले तो प्रधानाध्यापिका ने आवेदन का लिफाफा नहीं लिया। बाद में नोटिस के बाद अपूर्ण सूचना दी।

मुझे फंसाया गया...
प्रधानाध्यापिका ने मुख्य सूचना आयुक्त को बताया कि लिफाफे पर 'आरटीआई' के तहत सूचना के लिए प्रार्थना पत्र' शब्द नहीं लिखा हुआ था। आवदेनकर्ता ने बाद में उक्त शब्द लिखे। मुझे जबरन फंसाया गया। साक्ष्य के लिए प्रधानाध्यापिका ने विद्यालय के अन्य चार शिक्षकों के हस्ताक्षर भी करवा लिए, लेकिन बाद में वे मुकर गए। सूचना आयुक्त ने इस मामले को संदेहास्पद मानते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग, जयपुर के निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं।