जागो राजपुरोहित समाज ,,
कटु सत्य .राजनितिक दृष्टि से हम पिछड़ापन के शिकार हो रहे है ,इसका मुख्या कारण है ,एकता का आभाव ,हमारे समाज में एकता कि कमी है ,
इतनी जागरूकता होने के बावजूद भी हम दुसरो कि पेहरवी करने में सब से आगे रहते है ,क्या कारन है ,भाइओ ,अछे अछे कमेंट लिखे जाते है ,
एकता करो ,एक हो कर आगे बढ़ो ,होता कुछ भी नहीं है ,दूसरे समाज को देखे तो ,हमारे में तुच्छ भी एकता नहीं है ,क्या हमारी एकता कभी नहीं होगी
हक़ कि लड़ाई के के लिए हम सब कि आवज एक कभी नहीं होगी ,क्या हमारा समाज दूसरे समाजो कि तरह एकता का परचम कभी नहीं लहरायेगा ,
भाइओ ,जागो इस कमेंट को तहे दिल से अंतः आत्मा से ग्रहण करो ,ये १००% हकीकत है ,है कि हम पिछड़ रहे है ,हर वर्ग से ऊपर हम है ,एकता के ,
आभाव में ,इसलिए हमारा काम सिर्फ एक ही है .दुसरो का झंडा पकड़ कर .सबसे आगे चलना ,आप को सायद अछा नहीं लग रहा होगा ,लेकिन ये सच्च
है ,आजकल के दौर में हर वर्ग बिरादरी में कितनी एकता है ,चरम आती है ,क्या करे कटु सच्च तो ये ही है ,एकता के न कोई हवन यज्ञ होता है ,सिर्फ
सोच को बदला है ,सिर्फ सोच ,,,समाज के विभिन्न कार्यक्रमो में भाग लेना ,समाज के शीर्ष नेताओ कि बात को एहमियत देना ,समाज से सबंधित
केसा भी कार्य हो ,बढ़ चढ़ कर भाग लेना होगा भाइओ ,मुझे ये दो सब्द लिखते हुए ,दुःख हो रहा है ,और खुसी भी हो रही है ,खुसी इस बात कि ,मेरे
दवरा प्रेसित दो सब्द अगर आप के दिल में उतर जाये ,तलवार रुपी एकता का बिगुल बजे ,एकतावादी सूरज का न्य उदय हो जाये ,वर्त्तमान समय में
धन दौलत तो सब के पास है ,एकता नहीं है तो धन किस काम का ,भौतिक और आर्थिक सुख तो सब के जीवन में परकृति विद्यमान होता है ,
जागो जागो ,समय हाथ से निकला जा रहा है ,राजपुरोहितों कि एक ही पुकार ,हम सब मिलकर चले ,हमारा हक़ हमें भी मिले ,,जय
खेतेश्वर दाता री,,,जय हो राजपुरोहित समाज री ,जय गो माता री ,,,समाज सेवक जगदीश राजपुरोहित
जिला जालोर राजस्थान
कटु सत्य .राजनितिक दृष्टि से हम पिछड़ापन के शिकार हो रहे है ,इसका मुख्या कारण है ,एकता का आभाव ,हमारे समाज में एकता कि कमी है ,
इतनी जागरूकता होने के बावजूद भी हम दुसरो कि पेहरवी करने में सब से आगे रहते है ,क्या कारन है ,भाइओ ,अछे अछे कमेंट लिखे जाते है ,
एकता करो ,एक हो कर आगे बढ़ो ,होता कुछ भी नहीं है ,दूसरे समाज को देखे तो ,हमारे में तुच्छ भी एकता नहीं है ,क्या हमारी एकता कभी नहीं होगी
हक़ कि लड़ाई के के लिए हम सब कि आवज एक कभी नहीं होगी ,क्या हमारा समाज दूसरे समाजो कि तरह एकता का परचम कभी नहीं लहरायेगा ,
भाइओ ,जागो इस कमेंट को तहे दिल से अंतः आत्मा से ग्रहण करो ,ये १००% हकीकत है ,है कि हम पिछड़ रहे है ,हर वर्ग से ऊपर हम है ,एकता के ,
आभाव में ,इसलिए हमारा काम सिर्फ एक ही है .दुसरो का झंडा पकड़ कर .सबसे आगे चलना ,आप को सायद अछा नहीं लग रहा होगा ,लेकिन ये सच्च
है ,आजकल के दौर में हर वर्ग बिरादरी में कितनी एकता है ,चरम आती है ,क्या करे कटु सच्च तो ये ही है ,एकता के न कोई हवन यज्ञ होता है ,सिर्फ
सोच को बदला है ,सिर्फ सोच ,,,समाज के विभिन्न कार्यक्रमो में भाग लेना ,समाज के शीर्ष नेताओ कि बात को एहमियत देना ,समाज से सबंधित
केसा भी कार्य हो ,बढ़ चढ़ कर भाग लेना होगा भाइओ ,मुझे ये दो सब्द लिखते हुए ,दुःख हो रहा है ,और खुसी भी हो रही है ,खुसी इस बात कि ,मेरे
दवरा प्रेसित दो सब्द अगर आप के दिल में उतर जाये ,तलवार रुपी एकता का बिगुल बजे ,एकतावादी सूरज का न्य उदय हो जाये ,वर्त्तमान समय में
धन दौलत तो सब के पास है ,एकता नहीं है तो धन किस काम का ,भौतिक और आर्थिक सुख तो सब के जीवन में परकृति विद्यमान होता है ,
जागो जागो ,समय हाथ से निकला जा रहा है ,राजपुरोहितों कि एक ही पुकार ,हम सब मिलकर चले ,हमारा हक़ हमें भी मिले ,,जय
खेतेश्वर दाता री,,,जय हो राजपुरोहित समाज री ,जय गो माता री ,,,समाज सेवक जगदीश राजपुरोहित
जिला जालोर राजस्थान
