जालोर। जिले में गोचर-ओरण की
करीब चार हजार हैक्टेयर भूमि पर अतिक्रमियों का कब्जा है। लेकिन इस भूमि को
अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अब तक कोईअसरकारक कार्रवाई नहीं की गई।जिला प्रशासन की
कार्रवाई के अभाव में ओरण-गोचर व नाडियों पर अतिक्रमण लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
हालांकि गत दिनों जिला कलक्टर ने सभी उपखंड अघिकारियों की बैठक कर ओरण-गोचर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में प्रगति लाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह हैकि जिला प्रशासन के पास पहले से ही अतिक्रमित भूमि चिह्नित की जा चुकी है। लेकिन कार्रवाईके नाम पर ढाक के तीन पात वाली स्थिति बनी हुई है।
हो रहा व्यावसायिक उपयोग
जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर बिशनगढ़ में वर्ष2007 में अंसीदेवी प्रतापजी रिलीफेयर चेरीटेबल ट्रस्ट को कैलाश धाम के लिए 4.75 हैक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी।कहने को इस भूमि पर विशाल प्रतिमा स्थापित कर दी गई, लेकिन बाद में यहां रेस्टोरेंट भी शुरू कर दिया गया। इतना ही नहीं शादी एवं अन्य समारोहों के लिए भी यह भूमि किराए पर दी जा रही है। इसी तरह निकटवर्तीगोदन गांव के गोचर-ओरण में पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए जमीन आवंटित की गई। यहां कॉलेज भवन निर्माणाधीन है। इतना ही नहीं प्रशासन की ओर से जिले में पेट्रोल पम्प, निजी रिफाइनर को भी भूमि आवंटित कर दी गई।
न्यायालय के निर्णय की धçज्जयां
सर्वोच्च न्यायालय ने जगपालसिंह एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य व अन्य के मामले में निर्णय पारित किया। दिनांक 28 जनवरी 2011 को पारित निर्णय में चरागाह, जोहड़ पायतन और तालाबों की भूमियों में से निजी अथवा व्यवसायिक उपयोग के लिए दी गई भूमियों अर्थात किए गए आवंटनों को अवैध माना।
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश में ऎसे आवंटियों को अतिक्रमी मानते हुए उन्हें बेदखल करने के निर्देश दिए। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस किस्म की भूमियों को अतिक्रमियों व आवंटियों से मुक्त करवाने के लिए कार्रवाई करने को कहा और समय समय पर प्रगति से न्यायालय को अवगत करवाने के निर्देश भी दिए। बावजूद इस निर्णय की पालना करने के बजाय खुलेआम इसकी धçज्जयां उड़ाई जा रही है।
चला प्रशासन का डण्डा
शहर के धवला रोड पर गोचर भूमि में अतिक्रमण का समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।शनिवार को उपखंड अघिकारी एवं तहसीलदार की मौजूदगी में करीब दो बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 19 जुलाई के अंक में 'खतरे में ओरण-गोचर' शीष्ाüक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार में जिला मुख्यालय पर धवला रोड स्थिति दो बीघा गोचर भूमि पर अतिक्रमण का खुलासा किया गया था।
इनका कहना है
धवला रोड पर ढाईबीघा गोचर भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाया गया है।पूर्व में आवंटित भूमि की शर्तो की जांच की जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में शर्तो के उल्लंघन वाले आवंटन खारिज किए जाएंगे। साथ ही ओरण-गोचर व चरागाहों पर अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
राजन विशाल, जिला कलक्टर, जालोर

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