केंद्र; सरकार के सूचना के अधिकार अधिनियम में संशोधन बिल पास नहीं होने से आरटीआइ कार्यकर्ता खुश हैं। उनका कहना है कि संशोधन हो जाता तो आम आदमी के अधिकार छिन जाते।
आर .टी .आई एक्टिविस्ट जगदीश आर पुरोहित l कहते हैं कि इस बिल में संशोधन से आम आदमी व आरटीआइ कार्यकर्ताओं पर प्रहार हो जाता। आरटीआइ से देश में बड़े-बड़े घोटालों की पोल खुल रही है। इससे घबरा कर ही सरकार ने बदलाव का निर्णय लिया था। बिल में संशोधन के बाद अधिकारियों व राजनेताओं की मनमानी चलती। आर टी आई एक्टिविस्ट भरत एस राजपुरोहित कहते हैं कि सूचना का अधिकार आम आदमी का अधिकार है। इसमें संशोधन हो जाता तो उनके अधिकारियों का हनन होता। बिल में संशोधन के बाद अधिकारी अपने पक्ष की जानकारी तो दे देते। जो खिलाफ जाता उसे छिपा जाते और आवेदन रद कर देते। निगम में कई घोटाले का खुलासा करने वाले सुरेश गोयल कहते हैं कि सूचना के अधिकार अधिनियम से सरकार की पोल पट्टी खुल रही है। इससे सरकार परेशान है और लोगों के अधिकार कम करना चाहती है। इसमें संशोधन नहीं हुआ अच्छी बात है और आगे भी संशोधन नहीं होना चाहिए।
आर .टी .आई एक्टिविस्ट जगदीश आर पुरोहित l कहते हैं कि इस बिल में संशोधन से आम आदमी व आरटीआइ कार्यकर्ताओं पर प्रहार हो जाता। आरटीआइ से देश में बड़े-बड़े घोटालों की पोल खुल रही है। इससे घबरा कर ही सरकार ने बदलाव का निर्णय लिया था। बिल में संशोधन के बाद अधिकारियों व राजनेताओं की मनमानी चलती। आर टी आई एक्टिविस्ट भरत एस राजपुरोहित कहते हैं कि सूचना का अधिकार आम आदमी का अधिकार है। इसमें संशोधन हो जाता तो उनके अधिकारियों का हनन होता। बिल में संशोधन के बाद अधिकारी अपने पक्ष की जानकारी तो दे देते। जो खिलाफ जाता उसे छिपा जाते और आवेदन रद कर देते। निगम में कई घोटाले का खुलासा करने वाले सुरेश गोयल कहते हैं कि सूचना के अधिकार अधिनियम से सरकार की पोल पट्टी खुल रही है। इससे सरकार परेशान है और लोगों के अधिकार कम करना चाहती है। इसमें संशोधन नहीं हुआ अच्छी बात है और आगे भी संशोधन नहीं होना चाहिए।

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